परिजन और रिश्तेदारों की रजामंदी के बगैर शादी करके सुरक्षा के लिए अदालत पहुंचने के मामले जम्मू में लगातार बढ़ रहे हैं। यह इसी से समझा जा सकता है कि जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने बीते शुक्रवार मुस्लिम तरीके से शादी करने वाले तीन जोड़ों को सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले इसी माह दो इस तरह के मामलों में हाईकोर्ट सुरक्षा देने के निर्देश दे चुका है।

जस्टिस मोक्षा खजूरिया काजमी ने इन मामलों की सुनवाई करते हुए साफ किया कि अगर इन आवेदकों के खिलाफ किसी अन्य घटना के संबंध में कोई मामला दर्ज होता है कि संबंधित मामले की जांच पर इस आदेश का कोई असर नहीं पड़ेगा। इन जोड़ों में एक मामला नुसरत जबीन एवं अन्य बनाम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर एवं अन्य का है। इनकी शादी बीती 18 फरवरी को हुई थी।

उन्होंने अपनी मर्जी से शादी कर पति-पत्नी की तरह रहने का हवाला देते हुए अपने जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा की मांग की थी। दूसरा मामला परवेजा बानू एवं अन्य बनाम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का है। इनकी शादी बीती 14 अप्रैल को हुई। शादी के तुरंत बाद उन्होंने हाईकोर्ट में परिजन और रिश्तेदारों से हिंसा की आशंका जताते हुए अपने वकील के जरिये आवेदन दिया। तीसरा मामला शफीक अहमद एवं अन्य बनाम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का है। इस जोड़े ने बीती 13 अप्रैल को शादी रचाई थी। इसी महीने दो अन्य जोड़ों ने शादी करने के बाद सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट के पास गुहार लगाई थी। एक मामला मनजीत कौर का था जिन्होंने हिंदू रीति-रिवाज से शादी की थी। एक अन्य मामला मुस्लिम युवक का था।

20 साल पुराने लता सिंह बनाम यूपी मामले का हवाला दिया

इन सभी मामलों में जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करने संबंधी फैसला देते हुए हाईकोर्ट ने 20 वर्ष पुराने 2006 के लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य का हवाला दिया। इसके साथ ही उसने शक्ति वाहिनी बनाम भारत संघ एवं अन्य मामलों का भी जिक्र किया।

इस तरह के ट्रेंड बढ़ रहे हैं। युवा अपनी मर्जी से शादी करके अदालत पहुंचते हैं। सुरक्षा मांगते हैं। घरवालों के तैयार न होने की धर्म एक बड़ी वजह है। पिछले महीने भी इसी तरह के मामले आए थे, हालांकि उनमें जज ने सुरक्षा देने से इन्कार कर दिया था। इसके बावजूद इस तरह के केस ज्यादा आ रहे हैं।

इन दिनों युवाओं के अपनी मर्जी से शादी का एक बड़ा कारण मीडिया और फिल्मों को दे सकते हैं। दूसरे इन दिनों ज्यादातर युवा आत्मनिर्भर हैं। वे अपने निर्णय खुद लेने में यकीन करते हैं और किसी की दखलअंदाजी उन्हें पसंद नहीं आती। यही वजह है कि वे दूसरे मजहब, दूसरे धर्म में शादी करने को अब गंभीर मामला नहीं मानते हैं।

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